SSL Certificate क्या है? और यह काम कैसे करता है?

By | September 30, 2021

SSL Certificate क्या है? और यह काम कैसे करता है? – आप सब तो जानती हैं कि आज का समय कितना ज्यादा आधुनिक बन गया है। आज के समय में लोग अपने किसी भी प्रकार के कार्य को करने के लिए इंटरनेट का सहारा लेते हैं। आज के समय में बहुत से लोग इंटरनेट के माध्यम से ऑनलाइन बिजनेस भी करते हैं। इन्हीं ऑनलाइन बिजनेस में से एक है वेबसाइट डेवलपमेंट और ब्लॉगिंग।

वेबसाइट डेवलपमेंट और ब्लॉगिंग के बारे में तो आप सब जानते ही होंगे। आज के समय में वेबसाइट से रिलेटेड एक डाटा फाइल लांच किया गया है जिसका नाम है एसएसएल सर्टिफिकेट। यदि आप एक वेबसाइट डेवलपर और ब्लॉगर है तो आपके लिए एसएसएल सर्टिफिकेट के बारे में जानना बहुत ही जरूरी है। तो चलिए इसके बारे में विस्तार से जानते हैं।

SSL Certificate क्या है

यदि हम लोग एसएसएल सर्टिफिकेट का टेक्निकल डेफिनेशन जानेंगे तो यह एक तरह का डाटा फाइल होता है, जो कि किसी भी वेबसाइट की वेब सर्वर पर होस्टेड होता है। यह डाटा फाइल किसी भी वेब सर्वर और वेबसाइट यूजर के वेब ब्राउज़र के बीच में होने वाली कम्युनिकेशन को इंक्रिप्शन के माध्यम से सिक्योर बनाती है।

सीधे और सरल शब्दों में कहा जाए तो एसएसएल सर्टिफिकेट वेब सर्वर और वेबसाइट यूजर के बीच में होने वाली डाटा के आदान-प्रदान को सुरक्षित रखने का काम करता है। जैसे कि आप जब भी किसी वेबसाइट पर जाते हैं तो आपको उस वेबसाइट के वेब ब्राउज़र के एड्रेस बार में वेबसाइट के नाम के आगे http या https लिखा हुआ देखा ही होगा।

यह https यह दर्शाता है , कि वह वेबसाइट एक एस एस एल सिक्योरड वेबसाइट है । यदि आप ने किसी भी वेबसाइट मे http लिखा हुआ देखा है तो इसका मतलब यह होता है कि उस वेबसाइट यूजर ने अपनी वेबसाइट मे एसएसएल सर्टिफिकेट का इस्तेमाल नहीं किया है जिसका मतलब यह होता है कि वह वेबसाइट एस एस एल सिक्योरड वेबसाइट नहीं है।

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एसएसएल सिक्योर्ड वेबसाइट का सीधा सा मतलब यह होता है कि किसी भी वेबसाइट पर जो भी डाटा डालाएगा वो एक इंक्रिप्टेड फॉर्म में उस वेबसाइट के वेब सर्वर तक पहुंचेगा। और इसी तरह से उस वेब सर्वर से यूजर्स तक पहुंचने वाला डाटा भी इंक्रिप्टेड होता है। इंक्रिप्टेड का मतलब होता है कि वेबसाइट के अंतर्गत जो भी डाटा होता है वह कोड लैंग्वेज में होता है ,ताकि उसे कोई भी हैक ना कर सके।

SSL Certificate काम कैसे करता है

अब आपको पता तो चल ही गया है कि एसएसएल सर्टिफिकेट क्या होता है। तो अब बारी है कि एसएसएल सर्टिफिकेट काम कैसे करता है । तो चलिए जानते हैं।

जब भी आप किसी भी वेबसाइट पर विजिट करना चाहते हैं जो कि एक एसएसएल सिक्योर्ड वेबसाइट होगा तो इसके लिए आपको अपने वेब ब्राउज़र के ऐड्रेस बार के माध्यम से कुछ वेबसाइट का यूआरएल कोड डालकर सर्च कर लेंगे जो कि कुछ- https://xyz.in ऐसा होगा।

जब आप उस वेबसाइट को सर्च करने के बाद इंटर के बटन को दबाएंगे तो आपका वेब ब्राउजर उस वेबसाइट के वेब सर्वर एक एस एस एस सिक्योर्ड वेब पेज को भेजने की रिक्वेस्ट मांगेगा।

इसके बाद उस वेबसाइट का वेब सर्वर आपके वेब ब्राउज़र को अपनी पब्लिक की और एसएसएल सर्टिफिकेट प्रदान कर देगा। उस एसएसएल सर्टिफिकेट के अंतर्गत एक सर्टिफिकेट अथॉरिटी का डिजिटल सिग्नेचर मौजूद होगा।

आपके वेब ब्राउज़र को जैसे ही उस वेबसाइट के वेब सर्वर के द्वारा भेजा गया एसएसएल सर्टिफिकेट मिलेगा तो वह उस सर्टिफिकेट के अंतर्गत मौजूद डिजिटल सिग्नेचर को वेरीफाई करेगा। अगर वह इस डिजिटल सिग्नेचर को सही पाता है तो ही उस वेबसाइट के एसएसएल सर्टिफिकेट को वैलिड मानेगा।

वेरीफिकेशन प्रोसेस कंप्लीट होते हि आपके वेब ब्राउज़र के अंतर्गत एक ग्रीन कलर का पैड लॉक दिखने लगेगा। उसके बाद आपका ब्राउज़र दो सीक्रेट किस बनाएगा, जो कि एक जैसे ही होंगे। लेकिन उसमें से एक किस को वे अपने पास ही रखेगा और दूसरे किस को उस वेबसाइट के वेब सर्वर को भेज देगा।

अब आपके वेब ब्राउजर और उस वेबसाइट के वेब सर्वर के पास एक एक सीक्रेट कीस हो जाएगा जिसकी मदद से अब दोनों आपस में किसी भी प्रकार के डाटा का आदान प्रदान कर सकते हैं। इसी तरह उस वेब सर्वर से वैब यूजर तक पहुंचने वाला डाटा

 

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